भोपाल,  शहर का रेलवे स्टेशन ईको स्मार्ट बनेगा। यानी एक तरह का ग्रीन रेलवे स्टेशन। ये वे स्टेशन होते हैं, जहां की हवा काफी शुद्ध और वातावरण गंदगी मुक्त होता है। इसका लाभ रोजाना 50 हजार से अधिक यात्रियों को होगा। इन्हें शुद्ध हवा और अच्छा वातावरण मिलेगा। ईको स्मार्ट स्टेशन के लिए देश के 37 बड़े स्टेशनों का चयन किया गया है।

इसमें मप्र का भोपाल और जबलपुर स्टेशन शामिल है। भोपाल को ईको स्मार्ट स्टेशन बनाने के लिए बजट का आवंटन नहीं हुआ है। इसके लिए विस्तृत प्लान बनाया जाएगा। इसके आधार पर बजट तय होगा। वहीं ईको स्मार्ट स्टेशन को मापदंडों के आधार पर बनाए रखने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा।

रोज 150 ट्रेनें गुजरती हैं

रेलवे की माने तो भोपाल स्टेशन से 24 घंटे में 50 हजार (सामान्य सीजन में) से 75 हजार (अवकाश, शादियों के सीजन में) यात्री गुजरते हैं। जबकि 150 से अधिक यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। ईको स्मार्ट स्टेशन बनने से इन यात्रियों को फायदा होगा।

ये होंगे काम

- शुद्ध पानी मिलेगा। स्टेशन से निकलने वाले खराब पानी को रिसायकिल कर छोड़ा जाएगा।

- परिसर में धूल नहीं होगी।

- स्टेशन परिसर में कचरा नहीं मिलेगा। कचरे का व्यवस्थित निष्पादन होगा।

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अभी स्टेशन की यह हकीकत

साल 2018 में देश के 75 ए-1 श्रेणी के स्टेशनों में भोपाल को स्वच्छता में 30वीं रैंक मिली थी। भोपाल स्वच्छता में सबसे अधिक सुधार वाला नंबर-1 स्टेशन बन गया था। साल 2017 में भोपाल स्टेशन को 74वीं रैंक मिली थी। साल 2019 की स्वच्छता रैंकिंग अभी नहीं आई है। अब भोपाल का चयन ईको स्मार्ट स्टेशन के लिया हुआ है। कुल मिलाकर अब स्टेशन को पूरी तरह गंदगी मुक्त बनाना होगा।

स्टेशन को ईको स्मार्ट बनाने का काम तय समय में पूरा करेंगे। इससे यात्रियों को कई फायदे होंगे। - शोभन चौधरी, डीआरएम भोपाल मंडल